परिचय

एकीकृत बाल विकास योजना: भारत में बढ़ते कुपोषण को देखते हुए किशोर उम्र की महिलाओं को और गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार और स्वास्थ जांच की सुविधा देने के लिए एकीकृत बाल विकास योजना की शुरुआत की गई है। इसके अलावा 0 वर्ष से 6 वर्ष के बच्चों को टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ शिक्षा जैसी अन्य सुविधाएं देने हेतु से साल 1975 से ही आईसीडीएस की शुरआत भारत सरकार ने की थी। यह एक कुपोषण मुक्त देश का अभियान ही हैं जिसे देश के सभी राज्यों में लागू किया गया हैं। 


ekikrit bal vikas yojana
एकीकृत बाल विकास योजना


एकीकृत बाल विकास योजना को साल 1975 शुरू तो किया गया था लेकिन 3 साल के अंदर ही इस योजना को बंद भी किया गया था। उसके बाद भारत सरकार की दसवीं पंचवर्षीय योजना के तहत दुबारा से शुरू किया गया हैं। अब यह महिला बाल विकास योजना कई सालों से भारत के हर राज्य में सफलता पूर्वक शुरू हैं। अगर आपके घर में भी किशोर उम्र की लड़कियां, गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे हैं तो इस आईसीडीएस योजना के तहत लाभ लेने के लिए आवेदन करें। इस पोस्ट के अंत में आईसीडीएस योजना से मिलने वाले लाभ, एकीकृत बाल विकास योजना की पात्रता और एकीकृत बाल विकास योजना में आवेदन करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई हैं। 


Integrated Child development Services overview

विशेषता

विवरण

योजना का नाम


एकीकृत बाल विकास योजना

योजना का नाम (English)


Integrated Child Development Service

योजना की शुरुवात


मुख्य शुरुवात 2 अक्टूबर साल 1975 

विभाग



महिला एवं बाल विकास विभाग (सभी राज्यों में लागू)

उद्देश्य






गर्भवती महिलाओं और 0- 6 साल के बच्चों को स्वास्थ सुविधाएं प्रदान करके कुपोषण दूर करना

लाभार्थी






देश के ग्रामीण /शहरी विभागों की गर्भवती महिलाएं, किशोर अवस्था वाली लड़कियां और 0- 6 साल के बच्चें।

मुख्य लाभ





मुफ्त में टीकाकरण, पोषक आहार, शिक्षा(पूर्व) , रेफरल सेवाएं आदि।

पात्रता




देश के निवासी नागरिक होने चाहिए। आयु मर्यादा से ज्यादा उम्र नहीं होनी चाहिए।

आयु







बच्चों के लिए आयु मर्यादा (0 - 6 वर्ष)

और किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के लिए आयु मर्यादा (15- 45 वर्ष)

आवेदन प्रक्रिया



ऑफलाइन / ऑफलाइन (राज्य सरकार के अनुसार)

आवश्यक दस्तावेज






जन्म प्रमाणपत्र, आंगनवाड़ी केन्द्र का गर्भवती कार्ड, स्वास्थ कार्ड, बच्चे का जन्म प्रमाण आदि।

आवेदन की समय सीमा

सभी राज्यों में शुरू हैं। 


संपर्क जानकारी



अपने राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग से संपर्क करें। 


एकीकृत बाल विकास योजना क्या है?

एकीकृत बाल विकास योजना भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में से एक हैं जिसका उद्देश्य शिशु मृत्यु दर को कम करना, गर्भवती महिलाओं के पोषण स्थिति में सुधार करना और कुपोषण दूर करना हैं। इस योजना के तहत कई सुविधाएं महिलाओं को दी गई हैं। बच्चों का बचपन से देखभाल, विकास, शिक्षा और स्वास्थ जांच इस योजना के तहत किया जाती हैं। 


ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा तर गरीबी रेखा के नीचे वाले परिवारों की संख्या ज्यादा हैं। कई बार गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार ना मिलने के कारण उन्हें स्वास्थ से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। उनके बच्चे भी कुपोषण का शिकार होते हैं। पोषण आहार की कमी से शिशु मृत्यु दर भी बढ़ जाता हैं। बच्चे के जन्म के बाद 6 साल तक स्वास्थ की  जांच ना होने और आवश्यक पोषण आहार ना मिलने के कारण मृत्यु हो जाती हैं। महिला और बच्चो को सभी स्तर पर सहायता मिले इस लिए एकीकृत बाल विकास सेवा योजना अभियान की शुरुआत की गई हैं। 


आंगनवाड़ी बाल विकास योजना क्या है?

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना cg को राज्य के हर ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू किया गया हैं। इस योजना का लाभ आंगनवाड़ी केन्द्र के माध्यम से लाभार्थी महिलाओं और बच्चों तक पहुंचाया जाता हैं। इस आंगनवाड़ी बाल विकास योजना के तहत गर्भवती महिलाएं और स्तनपान करने वाली महिलाओं को पात्र माना जाएगा। योजना के तहत 0 से 6 साल के बच्चों की देखभाल बचपन से ही की जाती हैं। इस आंगनवाड़ी बाल विकास योजना के अंतर्गत टीकाकरण, स्वास्थ की जांच, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पूरक पोषण आहार, छोटे बच्चों को स्कूल जाने से पहले दी जाने वाली अनौपचारिक शिक्षा इस के साथ ही स्वास्थ से जुड़ी शिक्षा और रेफरल सेवाएं भारत सरकार दे रही हैं। 


आंगनवाड़ी में चलाई जा रही यह महिला बाल विकास योजना के पोषण आहार में गर्भवती महिलाओं और उनके छोटे बच्चों को हेल्थी खाने की किट मिलेगी जिसे महिलाएं घर में ही पका के खा सकेंगी। आईसीडीएस योजना के आहार में आंगनवाड़ी में जाने वाले बच्चों को गर्म पका हुआ खाना और नाश्ता दिया जाएगा। इसके अलावा आंगनवाड़ी में महिलाओं को उनके स्वास्थ से जुड़ी आवश्यक शिक्षा दी जाती हैं। बच्चों को स्कूल में दाखिला लेने से पहले आवश्यक अनौपचारिक शिक्षा भी दी जाती हैं। आंगनवाड़ी में बच्चों के वजन को नियंत्रित रखना, उनके स्वास्थ की जांच करना और टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित करना यह सभी काम आंगनवाड़ी बाल विकास योजना के तहत किए जाते हैं। 


बाल विकास योजना का उद्देश्य क्या है

एकीकृत बाल विकास योजना को शुरू करने के कई उद्देश्य भारत सरकार ने रखे थे। यह उद्देश्य धीरे धीरे पुरे भी हो रहे हैं। आईसीडीएस योजना के तहत क्या टारगेट रखे गए हैं इसके बारें में जान लेते हैं।


  1. एकीकृत बाल विकास योजना का मुख्य उद्देश्य 0 से 6 वर्ष के बच्चों और उन की माताओं की पोषण स्थिति में सुधार लाना था क्योंकि गर्भ में ही शुरुआत से ही बच्चे को पोषक खाना देना जरूरी हैं। 


  1. देश में बढ़ रहे शिशु मृत्यु दर को कम करना और बच्चों में बढ़ रहे कुपोषण को नियंत्रित करना। 


  1. 0 से 6 वर्ष के बच्चे और 15 से 44 वर्ष तक की सभी स्तनपान करने वाली माताएं और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ जांच की सुविधाएं देना।


आईसीडीएस योजना से मिलने वाले लाभ

एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत दिए गए लाभों को सूची आगे दी गई हैं।

1) पूरक पोषण देना

एकीकृत बाल विकास योजना के तहत गर्भवती स्तनपान करने वाली माताओं को और उनके 0- 6 वर्ष के बच्चों को 300 दिन के लिए पोषक आहार देने की सुविधा दी गई हैं।

2) प्रतिरक्षा

आईसीडीएस योजना के तहत टीकाकरण कार्यक्रम द्वारा बच्चों के जन्म से लेके 6 साल होने तक पोलियो, खसरा, टीबी जैसी बीमारियों के लिए टिके लगाए जाते हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को टेटनस के टिके लगाए जाते हैं।

3) स्वास्थ और पोषण शिक्षा 

एकीकृत बाल विकास योजना इस अभियान द्वारा 15 वर्ष से लेके 45 वर्ष की महिलाओं को और किशोरियों को स्वास्थ और पोषण से जुड़ी जानकारी दी जाती हैं जिसे वे स्वस्थ रहे और अपना और अपने बच्चे का खयाल रख सके। गर्भवती महिला जितनी स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेंगी उतने ही उनके बच्चे भी रहेंगे। 

4) स्कूल से पहले अनौपचारिक शिक्षा देना 

स्कूल से पहले अनौपचारिक शिक्षा देना यह भी लाभ एकीकृत बाल विकास योजना के तहत दिया जाता हैं। 0- 6 वर्ष के बच्चों स्कूल जाने से पहले आंगनवाड़ी केंद्रों में उनके स्वास्थ और विकास के लिए अनौपचारिक शिक्षा इस योजना के माध्यम से दी जाती हैं।

5) रेफरल सेवाएं देना

ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्र में गर्भवती स्तनपान करने वाली महिलाओं और 0- 6 वर्ष के बच्चों की देखभाल की जाती हैं। इस देखभाल के दौरान इनकी नियमित स्वास्थ जांच भी की जाती हैं। जांच के दौरान अगर महिला या बच्चे में किसी बीमारियों या रोग के सिमटम्स दिखते हैं तो उन्हे तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में रेफर करने की सुविधा इस महिला बाल विकास योजना के तहत दी जाती हैं।

6) स्वास्थ और पोषण की जांच -

एकीकृत बाल विकास योजना के अंतर्गत स्वास्थ और पोषण की जांच सुविधा का भी लाभ दिया जाता हैं। बच्चे से लेके मां ( प्रसूति के पहले और प्रसूति के बाद भी) तक की देखभाल की जाती हैं। इस योजना के तहत नियमित जांच की जाती हैं जिसमे वजन के रिकॉर्ड,  दस्त का उपचार, कृमि मुक्ति और टीकाकरण का समावेश हैं।


एकीकृत बाल विकास योजना की पात्रता

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना cg के अंतर्गत कोई भी पात्रता मापदंड नहीं रखें गए हैं। देश के किसी भी क्षेत्र की गर्भवती और स्तनपान करने वाले महिलाएं और 0- 6 साल के बच्चे और 15 साल या उससे ऊपर के उम्र वाली किशोर लड़कियां इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र मानी जाएंगी। अगर सामान्यता लाभार्थी देश का नागरिक होना चाहिए। महिलाओं के उम्र 15 से 45 वर्ष से ज्यादा ना हो यह पात्रता मापदंड रह सकते हैं। 


एकीकृत बाल विकास योजना में आवेदन करने की प्रक्रिया

आईसीडीएस योजना का लाभ लेने के लिए महिला बाल विकास योजना ऑनलाइन फॉर्म भरना जरूरी हैं। अपनी नजदीकी आंगनवाड़ी केन्द्र में जाके आंगनवाड़ी शिक्षिका/ सेविका के माध्यम से ऑनलाइन एकीकृत बाल विकास योजना का फॉर्म भरने। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आपका एकीकृत बाल विकास योजना रजिस्ट्रेशन करेगी और आपके आवेदन फॉर्म भर के महिला एवं बाल विकास विभाग में जमा कर देगी। एकीकृत बाल विकास योजना में आवेदन राज्यों राज्यों के अनुसार अलग अलग रह सकती है।


आईसीडीएस योजना में लगनेवाले दस्तावेज

  1. पहचान पत्र (आधार कार्ड)

  2. जन्म प्रमाणपत्र (महिला का) 

  3. बच्चे के जन्म का प्रमाण

  4. गर्भवती महिला स्वास्थ कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज


(एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के लिए लगने वाले दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हुई हैं। आंगनवाड़ी केन्द्र से पूरी जानकारी हासिल करें)


निष्कर्ष

एकीकृत बाल विकास योजना महिला एवं बाल विकास विभाग भारत सरकार की ओर से कुपोषण के खिलाफ चलाई जाने वाली योजना हैं। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसूति के पहले और प्रसूति के बाद भी देखभाल की जाती है। उन्हें पूरक पोषण आहार, स्वास्थ जांच, रेफरल सेवाएं प्रदान की जाती हैं। 0- 6 वर्ष के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार देके कुपोषण जैसी बीमारी से दूर रखना, बच्चो के मृत्यु दर को कम करना, लड़का और लड़की में भेदभाव की स्थिति सुधारना इस योजना का उद्देश्य हैं। गर्भवती महिलाओं ने खुद और अपने बच्चे के स्वास्थ को बेहेतर बनाने के लिए इस योजना के तहत नजदीकी आंगनवाड़ी केन्द्र से आवदेन करें।